Saturday, August 13, 2022
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यह है देश की पहली दृष्टिहीन आईएएस IAS ऑफिसर, बचपन में ही चली गई थी आंख की रोशनी

समाज में यदि किसी के अंदर शारीरिक रूप से कोई ऐप है तो महत्व देना कम कर देते हैं।लोगों इन्हें हीन की दृष्टि से देखते हैं।समाज में उनकी उपयोगिता न के बराबर होती है।आज हम आपको एक ऐसी महिला के विषय में बताएंगे जोकि नेत्रहीन है।

नेत्रहीन होने की वजह से उनको अपनी जिंदगी में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।इन्होंने नेत्रहीन होते हुए भी पढ़ाई की और सिविल सेवा का एग्जाम पास करके आईएएस अधिकारी बन गई आपको जानकर और भी हैरानी होगी इस महिला ने 28 वर्ष की उम्र में दूसरे ही अटेम्प्ट में आईएएस की परीक्षा पास कर लिया।इनकी ये सफलता ने साबित कर दिया की जहां कुछ करने की दृढ़ चाह होती है वहां सफलता अपने आप मिल जाती है।

प्राजंल जब छ: साल की थी तभी एक हादसे का शिकार हो गई जिसके चलते इन्होंने अपने आंखों की रोशनी खो बैठी।लेकिन ये घटना से भी वो हिम्मत न हारी।और वो मन लगाकर तैयारी में लगी रही ।

ये कहानी असल में महाराष्ट्र के उल्हासनगर की प्रांजल पाटिल की है।ये पूरी तरह से नेत्रहीन है लेकिन इन्होंने इसके बावजूद कुछ ऐसा कर दिखाया जोकि आंखो से सक्षम लोग ही कर सकते है।पहले अटेम्प्ट में प्रांजल ने 2016 में सिविल सर्विस एग्जाम क्लियर किया था।इस परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 773वीं हासिल की थी।

प्रांजल ने एक आंख की रोशनी छठी कक्षा के दौरान ही खो दी थी।किसी वजह से एक स्टूडेंट से उनकी आंख में पेंसिल लग गई थी इसके कारण आंख की रोशनी को दी थी वही दूसरे वर्ष उनकी दूसरी आंखों से भी दिखना बंद हो गया इन सबके बावजूद प्रांजल में उम्मीद नहीं खोई

ब्रेल लिपि के द्वारा पढ़ाई जारी रखी ।इसके साथ ही इन्होंने एक सॉफ्टवेयर से भी सहायता ली। इसके जरिए वह हर शब्द सुन पाती थी।तकनीक की सहायता लेकर प्रांजल आज खुद को अपने पैर पर खड़ा करने में कामयाब हो सकी।

प्रांजल में इंडियन रेलवे अकाउंट सर्विस का एग्जाम क्वालीफाई किया इस एग्जाम में इन्होंने 773 वी रैंक प्राप्त की, लेकिन रेलवे सर्विस डिपार्टमेंट में में उनके नेत्रहीन होने के कारण जॉब ऑफर नहीं दिया।

रेलवे के नियमों के अनुसार नेत्र हीन इस विभाग में नौकरी के लिए योग्य माने जाते हैं इस पर प्रांजल को बेहद दुख हुआ उन्होंने बिना हताश हुए आईएएस की परीक्षा की तैयारी करना शुरू कर दी वहीं 2016 में उन्होंने पहली बार UPSC की परीक्षा भी दी थी

दूसरी दूसरे अटेम्प्ट मिली बड़ी सफलता

असल में पहले प्रयास में प्रांजल ने 733वीं रैंक प्राप्त की इस रैंक के बाद भी वह नहीं हुई यही वजह है कि उन्होंने दूसरा प्रयास किया और नए सिरे से पढ़ाई की इस बार उनके हाथ बड़ी सफलता मिली साल 2017 में उन्हें 124 वीं रैंक मिली थी।

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