Saturday, August 13, 2022
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मनरेगा में मजदूरी करते थे पिता,होशियार बेटी ने केरल की पहली आदिवासी महिला IAS अधिकारी बनकर लोगो की प्रेरणा बनी

केरल में एक बेहद खूबसूरत जिला है वायनाड यहां पर ग्रामीण वर्ग के लोग अधिक रहते हैं खास बात तो यह है कि यहां का प्राकृतिक सौंदर्य लोगों को खूब लुभाता है वह नाटक आदिवासी इलाके के अंतर्गत आता है यह इलाका इस कदर पिछड़ा हुआ है कि यहां रहने वाले लोग स्कूल में पढ़ाई लिखाई सिख कहीं पीछे हैं और यहां की बुनियादी सुविधाओं में भी काफी कमी देखी गई है यहां के रहने वाले आदिवासी मुख्य रूप से मजदूरी करते हैं इसके अलावा छोटे मोटे व्यवसाय करके अपना गुजर-बसर करते हैं उनके बच्चे भी जंगलों में रहकर अपने मां-बाप के साथ टोकरी व हथियार आदि को बनाने में सहयोग देते हैं सहयोग देने के अलावा वे मजदूरी का भी काम किया करते हैं।

आपके जेहन में आ रहा होगा कि केरल के आदिवासी इलाके की आखिर कौन सी ऐसी खूबी है ?जो इसके बारे में हम इतनी बढ़ चढ़कर चर्चा कर रहे हैं। असल में इसी आदिवासी जिले की वायनाड की रहने वाली एक मजदूर पिता की बेटी ने गांव की पहली आईएएस ऑफिसर बनकर एक इतिहास रच दिया है। अब तो आप समझ ही गए होंगे कितने पिछड़े इलाके से संबंध रखने के बावजूद आदिवासी लड़की ने कितनी मुश्किलों को पीछे छोड़ते हुए, इतनी बड़ी सफलता प्राप्त की होगी उस लड़की ने अपनी कामयाबी से अपने राज्य का नाम रोशन किया है और अपने इलाके के लोगों को अंधकार से निकाल कर उन्नति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया है ,तो चलिए जानते हैं वाह होशियार लड़की कौन है? और उसने इतनी विषम परिस्थितियों में भी किस प्रकार इतनी बड़ी कामयाबी हासिल की।

आदिवासी जाति से IAS श्रीधन्या सुरेश


केरल जिले के वायनाड जिले में एक छोटे से गांव पोज़ुथाना की रहने वाली आदिवासी लड़की श्रीधन्या सुरेश ने कड़ी मेहनत के जरिए केरल की पहली आदिवासी आईएएस ऑफिसर बनी है।

श्रीधन्या कुरिचिया जनजाति से संबंध रखती है और यह निहायत ही गरीब परिवार से है इसका अंदाजा ऐसे लगा सकते हैं।इनके माता-पिता मनरेगा में मजदूरी करके अपना गुजारा करते हैं। मजदूरी के अलावा इनके पिताजी कई अन्य काम करके अपना खर्च चलाते हैं ।जैसे की टोकरियां बनाना, तीर धनुष बनाकर बेचना आदि मुश्किल से ही सही लेकिन जैसे- तैसे इनका खर्च निकल आता है।

विषम परिस्थितियों में भी इन्होंने अपनी बेटी को शिक्षित किया ।जबकि इनके पिता एक अनपढ़ मजदूर थे। श्रीधन्या ने अपनी शुरुआती पढ़ाई अपने गांव के प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की और आगे की पढ़ाई के लिए कोझीकोड के सेंट जोसेफ कॉलेज में एडमिशन लिया जहां से इन्होंने जूलॉजी सब्जेक्ट से ग्रेजुएशन व पोस्ट ग्रेजुएशन कंप्लीट किया।

श्रीधन्या ने अपने जीवन का लक्ष्य बना रखा था कि वह कुछ ऐसा हासिल करेगी जिससे आदिवासी समुदाय के लोगों की खराब स्थितियों में परिवर्तन आए। लेकिन उन्हें यह क्लियर नहीं था कि इसके लिए वह क्या करे ? उन्होंने पहले केरल के अनुसूचित जनजाति विकास डिपार्टमेंट में क्लर्क की नौकरी की, और उसके बाद वायनाड के आदिवासी हॉस्टल की वार्डन की पोस्ट पर काम करने लगी थी

UPSC परीक्षा में अपीयर होने की कलेक्टर ने दी सलाह
इनके जीवन में एक ऐसा मोड़ आया जब इनको एक सही मार्गदर्शक मिले जिन्होंने इनको कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित किया वह सज्जन कोई और नहीं वायनाड के कलेक्टर श्रीराम समाशिव राव जी हैं। जिनसे श्री श्रीधन्या की मुलाकात हॉस्पिटल में काम करने के समय हुई थी। इन्होंने श्रीधन्या को उनके जीवन का लक्ष्य निर्धारित करने में मुख्य रूप से सहयोग दिया।इन्होंने ही श्रीधन्या को UPSC की तैयारी करके पक्ष परीक्षा में अपीयर होने के लिए प्रेरित किया।

तीसरी बार में बनी IAS ऑफिसर


आदिवासी क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाली श्रीधन्या को पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली।इससे भी उन्होंने हार नहीं मानी। इन्होंने अपना इरादा बुलंद रखा। इस परीक्षा में दूसरी बार अपीयर होने पर भी इनको कामयाबी नहीं मिली। फिर भी इन्होंने अपनी तैयारी में कोई कमी नहीं रखी और जमकर परिश्रम करने लगी यही वजह है कि इन्होंने 2019 में ऑल इंडिया लेवल पर 410 वी रैंक हासिल की ।सफलता से उन्होंने अपने राज्य केरल का नाम रोशन किया।ये पहली केरल की IAS ऑफिसर बनी

दोस्तो ने पैसे इकट्ठे करके दिल्ली के लिए रवाना किया

श्रीधन्या द सिविल सर्विसेज की परीक्षा में तो बड़ी सफलता हासिल की लेकिन अब उनकी तैयारी थी। दिल्ली जाकर इंटरव्यू को क्लियर करने की इस दौरान इनकी फैमिली इतनी तंगी से गुजर रही थी। इनके पास दिल्ली जाने के लिए भी पैसा नहीं था। इस कठिन परिस्थिति में उनके दोस्त आगे बढ़े और पैसे इकट्ठे करके इन्हें दिल्ली के लिए रवाना किया

एक इंटरव्यू के दौरान श्रीधन्या ने कहा कि वह एक ऐसे राज्य से संबंध रखती है। जो कि निहायती पिछड़ा हुआ है। इनके इलाके में आदिवासी जनजाति की आबादी अधिक है, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है। यहां कोई आदिवासी IAS ऑफिसर बना हो।

निर्माणाधीन में घर में रहकर बनी IAS ऑफिसर


सरकार ने श्रीधन्या के पिता को अपने घर का निर्माण करने हेतु थोड़ी सी जमीन दी थी। हालांकि उनके पिताजी ने घर का काम शुरू भी करवाया था, लेकिन पैसे की आभाव में घर निर्माण को बीच में ही रोकना पड़ा। इसी निर्माणाधीन घर में श्रीधन्या और उनके उनका परिवार रहा करता था। अब जब श्रीधन्या IAS ऑफिसर बनी तो इन्होंने अपने संघर्ष की दास्तां में अपनी प्राथमिक शिक्षा से लेकर निर्माणाधीन घर तक का जिक्र किया।

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