Saturday, August 13, 2022
Google search engine
HomeBusinessअच्छी खासी नौकरी छोड़ पुनीत ने शुरू किया एडिबल कप का बिजनेस...

अच्छी खासी नौकरी छोड़ पुनीत ने शुरू किया एडिबल कप का बिजनेस , आज है 70 लाख का टर्नओवर

दिल्ली यानी दिल वालों के शहर के रहने वाले पुनीत दत्त MBA ग्रेजुएट है।इन्होंने लंबे समय तक मार्केटिंग और बिजनेस फील्ड में कार्य किया लेकिन अब इन्होंने कुछ इससे हटकर कर दिखाया है। जिससे उनकी अच्छी खासी इनकम हो रही है। इन्होंने गुड़ और अनाज से बने कब की मार्केटिंग का जिम्मा संभाला है। यह एक प्रकार का एडिबल कप है यानी कि इसको अपने उपयोग में लाने के बाद आप इसको खा भी सकते हैं। इस कप की भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी डिमांड है । एक दिन में इस कप के सैकड़ों आर्डर मिल रहे हैं ।इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इनका बिजनेस लगभग 70 से 80 लाख का है।खास बात तो यह है कि इन्होंने 50 लोगों को अब तक नौकरी भी दी है।

आज की पॉजिटिव खबर में आइए जानते हैं पुनीत के सफर और उनके बिजनेस के बारे में…
उनकी लाइफ में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था एक अच्छी खासी नौकरी थी काम भी इस तरह का था उसमें काफी फजीहत नहीं थी उस दौरान बिजनेस जैसी कोई चीज उनके दिमाग में नहीं थी लगभग 4 साल पहले की बात है हम हमारे परिवार के साथ वृंदावन को गए हुए थे सभी रास्ते में उन्हें यमुना नदी में कुछ पैसा हुआ दिखाई दिया वह चीज देख कर थोड़ा अजीब लगा उसकी लंबाई काफी अधिक थी उसको देखने के लिए मेरी दिलचस्पी उसने बड़ी और मैं कुछ समय के लिए ठहर गया और बाकी लोगों को आगे बढ़ने के लिए कह दिया

यमुना नदी में अजीब दृश्य को देखकर आया आइडिया


यमुना नदी में अजीब जब मैं नदी के पास पहुंचा ही था तो मुझे नजर आया कि बहुत बड़ा सा थर्माकोल बहता हुआ चला जा रहा था। यह वह दौर था जब भारत में प्लास्टिक फ्री की मुहिम जारी थी। मैंने काफी देर तक विचार किया कि हम लोग अब तक जो कुछ भी करते आए हैं। वह सब बेफिजूल का है।इन समस्याओं को दूर करने के लिए हम लोगों को ही कुछ करना होगा।

इतने साल 2019 में गुड़ और अनाज को मिक्स करके एक ऐसा एडिबल कप और प्लेट का बिजनेस प्रारंभ किया। इस बिजनेस को शुरू करने का विचार करते हुए मैं वृंदावन गया वहां देखा तो सब प्लेट और थाली खत्म हो चली थी ।भंडारे की भीड़ काफी अधिक थी। लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि प्रसाद कैसे लें? तभी देखा कि एक बाबा जी पूड़ी को ही गोल बनाकर उसमें सब्जी रख कर खा रहे हैं ।उनको प्लेट की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ी मेरे लिए वह सीन मेरी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ उसके बाद मैंने कुछ अलग कर दिखाने की ठानी

40 वर्ष के पुनीत का कहना है कि पॉल्यूशन फ्री मूवमेंट में लोगों को इस बात पर फोकस करना चाहिए कि वह अपनी तरफ से कम से कम कचरा फेंके। वहीं अधिकतर लोग इसी कॉन्सेप्ट पर कार्य करते हैं ,लेकिन मेरा मानना था कि कचरे पर रोक लगाने की जगह पर हम क्यों ना उन प्रोडक्ट को कचरे में शामिल करें ।जिसको फेंकने से हमें किसी तरह का नुकसान ना मिले बल्कि उससे हमको लाभ ही पहुंचे तभी मेरे दिमाग में वह बाबा वाला सीन घूमने लगा

एडिबल प्रोडक्ट का टिकाऊ होना हमारे लिए सबसे चैलेंजिंग टास्क था। भास्कर से बातचीत के दौरान पुनीत ने बताया कि ,”मैंने एडिबल प्लेट और कप को लेकर काम करना शुरू कर दिया इस फील्ड के लोगों इस बारे में जानकारी इकट्ठा कि इसके पूरे कौनसे को समझा काफी रिसर्च करने के बाद हमें इसमें सफलता मिली आज बिजनेस में काफी अच्छी खासी इनकम है तब मुझे इस बात का अंदाजा लगा कि जो लोग इस एडिबल कप को तैयार कर रहे हैं वह ना तो अधिक समय के लिए बिकाऊ है और ना ही खाने के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है इसलिए मैं लगातार इसके लिए रिसर्च करता रहा’

पुनीत का कहना था कि हमने कई वर्षों तक लोकल चाय बेचने वालों को अपने कप प्रोवाइड किए है उनके कस्टमर का अब तक अच्छा रिस्पॉन्स रहा है।

कहते हैं कि कहीं स्ट्रगल करते समय उनकी मुलाकात एक आदमी से हुई जो कि उन्हें इमारत दिखा रहा था ।यह इमारत मुड़ के इस्तेमाल से तैयार की गई थी ।पहले तो उन्हें जानकर थोड़ा अजीबोगरीब लगा लेकिन जब बाद में इसके बारे में जानकारी इकट्ठा की गई तो उन्हें पता चला कि गोडसे इस तरह की चीजें लंबे समय से बनाई जा रही है। वही हमारे पूर्वज नीव के लिए इसका इस्तेमाल किया करते थे ।एक स्टडी के मुताबिक गुड़ ही एक ऐसी प्रॉपर्टी है। जोकि गर्म चीज को काफी देर तक सहन करने की क्षमता रखता है। इसके बाद से मैंने गुड़ से एडिबल कप बनाने की योजना बनाई।

नौकरी छोड़ने के बाद नए कांसेप्ट से बिजनेस की शुरआत की
सन 2019 में मार्केटिंग की नौकरी कर करने वाले पुनीत ने नौकरी छोड़ कर आटावेयर नाम से अपना स्टार्टअप शुरू किया था। इन्होंने गुड़ और अनाज से बने कप प्लेट चम्मच बनाना शुरू किया इसकी जगह जगह पर स्टाल लगाकर मार्केटिंग करने लगे धीरे-धीरे इसका सकारात्मक रिस्पांस मिलने लगा लेकिन एक कमी जो उभरकर आई वह था मुनाफा यानी कि इस बिजनेस में इनकी कमाई नहीं हो पा रही थी।

उनका कहना था कि एक विदेशी संगठन में उन्हें मेले में बुलाया और वहां पर इनके प्रोडक्ट का स्टाल लगवाया गया तभी दिल्ली के एक यूट्यूबर ने इनका वीडियो बना लिया। उस दौरान इन्होंने बहुत अधिक ध्यान नहीं दिया लेकिन इनका एक वीडियो वायरल कर गया। तब से इनके काम को काफी सराहा गया और इसके बाद से बड़ी-बड़ी कंपनियों ने हम से टाईअप कर लिया थोड़े ही समय बाद उनके काम को एक नई पहचान मिलने लगी वर्ष 2020 से सभी कोरोना आ गया और इनका बिजनेस थम सा गया।

कोरोना के दौरान मार्केटिंग की ये रही स्ट्रैटजी


पुनीत का कहना था कि हमारी इस मुहिम में युवाओं का काफी सहयोग था लोगों ने इस तरह के इनोवेशन को काफी पसंद किया। पुनीत का मानना था कि कोरोना के दौरान लॉकडाउन लगने से इनकी बिजनेस को काफी नुकसान पहुंचा। कोई भी प्रोडक्ट बाहर ना जा सका एक्सपायर होने के डर से सारे के सारे प्रोडक्ट हमने गौशाला में ले जाकर गायों को खिलाना उचित समझा बेकार होने से तो कहीं अच्छा है कि पैसे की जगह कुछ और नहीं कमा लिया जाए। इसके बाद हमने अपने बिजनेस स्ट्रैटजी में थोड़ा बदलाव किया और प्रोडक्ट की वैरायटी में कमी कर दी प्लेट और चम्मच के बजाय चाय के कप पर अधिक फोकस किया क्योंकि देश में सबसे अधिक यदि कोई चीज उपयोग में लाई जाती है तो वह है चाय के कप

इसके बाद भारी संख्या में लोगों को चाय के लिए कप तैयार किए गए और सोशल मीडिया के द्वारा इसकी मार्केटिंग पर फोकस किया गया। इसके बाद हमें ऑर्डर मिलने शुरू हो गए और कारोबार पूरी तरह से चलने लगा महामारी के बाद उन्हें दूसरी लहर के समय 3 से 4 लाख का प्रॉफिट हुआ फिर चाय बेचने वालों ने उनसे संपर्क किया।बड़े दुकानदारों से लेकर होटल वालों के बीच हमारी डील हुई। लिहाजा हमारे बिजनेस को काफी फायदा हुआ

कई बेहतरीन फ्लेवर के एडिबल कप लांच किए

पुनीत का कहना था कि मार्केटिंग के समय चाय बेचने दुकानदारों से हमें पॉजिटिव फीडबैक मिला। असल में उनका मानना था कि लोग ग्रुप में चाय पीने आया करते हैं ,और उनकी अलग अलग वैरायटी की डिमांड होती है। किसी को अदरक फ्लेवर तो किसी को इलायची वही किसी को बिना शक्कर की चाय पीने का शौक होता है।ऐसे में उन्हें अलग-अलग फ्लेवर की चाय बनाने में काफी मशक्कत होती है ।इसलिए हमने निश्चय किया कि कप की वैरायटी भी बढ़ा कर रखी जाए जिससे कि अलग-अलग फ्लेवर की चाय बनाने की टेंशन न हो

धार्मिक आयोजनों में बड़े स्तर पर प्लास्टिक का उपयोग किया जाता है। इसलिए उन स्थानों पर जाकर हमने अपने प्रोडक्ट के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाई।

इसके बाद हमारी ओर से 9 तरह के कप लांच किए गए इसमें मुख्य रूप से अदरक, इलायची काफी , वेनेला तुलसी जैसे फ्लेवर को रखा गया। इस नॉर्मल चाय भरने से उसका टेस्ट कप की फ्लेवर के हिसाब से हो जाएगा

खाने या फेकने से आपका ही फायदा


पुनीत का आगे कहना था कि इसके इस्तेमाल करने के बाद हम लोगों को यही सजेस्ट करते हैं कि लोग इस कप को खा जाए। लेकिन वहीं कुछ लोग उसको खाना पसंद नहीं करते, तो ऐसे में हमें इससे कोई दिक्कत नहीं है। यदि आप इसे खाएंगे तो एक अच्छी बात है और यदि आप इसे फेंकते हैं तो इससे भी किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा जो जानवर इस कप को खाएंगे उनके लिए अच्छा होगा ये अगर कोई डीकंपोज भी करता है, तो उसको भी कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा जबकि हमारी यही कोशिश रहती है कि लोग इसे इधर-उधर फेंकने की जगह पर ऐसे स्थान पर फेंके जहां पर ऐसे जानवर खा सकें।

पुनीत आगे कहना था कि इस कप की खासियत थी कि इस कप में 5 से 6 घंटे तक गर्म चीज को रखने की क्षमता थी ।उस पर इसका कोई असर नहीं होगा। इतना ही नहीं इस कप को 6 महीने से अधिक समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे खाने से किसी व्यक्ति को कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा।वही इसकी कीमत का जिक्र करें तो ये बहुत अधिक महंगा भी नहीं है यह आपको सिर्फ 10 से 12 मुहैया हो जाएगा।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments